झारखंड की प्रोटो ऑस्ट्रोलायड प्रजाति ।। jharkhand protoastroloid -itsdpktym
झारखंड की प्रोटो ऑस्ट्रोलायड प्रजाति
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झारखंड की प्रोटो ऑस्ट्रोलायड प्रजाति
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Q.झारखंड में हर जिले में सोलर प्लांट लगाकर कितने मेगावाट बिजली उत्पादित की जाएगी
उत्तर-900 मेगा वाट
झारखंड देश का पहला राज्य होगा जिसके हर जिले में सोलर प्लांट स्थापित किया जाएगा ।इससे राज्य में बिजली की कमी को काफी हद तक पूरा किया जाएगा। राज्य में बिजली की वर्तमान औसत मांग 2050 मेगावाट है । मांग को आधार बनाते हुए अभी राज्य में 900 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए झारखंड सरकार ने हर जिले में सोलर प्लांट लगाने का फैसला लिया है ।जिसके हर प्लांट से 900 मेगावाट बिजली उत्पादित किया जाएगा ।इस समय राज्य में केवल 25 मेगा वाट सौर ऊर्जा का उत्पादन हो रहा है ।आने वाले समय में केतलशूद बांध जो रांची में स्थित है उस में तैरता हुआ सोलर प्लांट लगाया जा रहा है जिसमें 100 मेगा वाट का सोलर प्लांट लगाने का प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है।
इसके अलावा जितने भी झारखंड में सरकारी भवन है उनके छात्र पर 16 संयंत्र लगाने और उन से बिजली उत्पादित करने का तरीके को अपनाया जा रहा है।
पहले 2022 2023 तक जमीन पर सोलर संयंत्र लगाकर 500 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है अब हर जिले में सोलर प्लांट लगाकर 900 मेगा वाट सौर ऊर्जा उत्पादन किया जाएगा।
Q.झारखंड के नए राज्यपाल कौन बने हैं
उत्तर- रमेश बैस
भारत के राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद ने झारखंड सहित देश के कुल 7और राज्यों में राज्यपालों का बदलाव किया है। जिसमें से चार राज्यपालों का हस्तांतरण किया है और 4 नए राज्यपालों की नियुक्ति की है।
नए राज्यपालों एवं राज्यों के नाम इस प्रकार है
राज्यपाल राज्य
झारखंड - रमेश बैस
हरियाणा -बंडारू दत्तात्रेय
गोवा -पीएस श्रीधरन पिल्ले
मध्य प्रदेश - भाई छगनभाई पटेल
त्रिपुरा - सत्यदेवनारायण आर्य
मिजोरम - डॉ हरी बाबू कमभम पति
कर्नाटक - थावरचंद गहलोत
हिमाचल प्रदेश - राजेंद्र विश्वनाथ अलंकर
बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के अनुवांशिक एवं पौधा प्रजनन विभाग के मुख्य वैज्ञानिक डॉक्टर सोहन राम को बेस्ट साइंटिस्ट अवार्ड प्रदान किया गया है ।
बिरसा कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना दिवस अवसर पर सोहन राम को बेस्ट साइंटिस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया है।
बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस इस बार 26 जून 2021 को मनाया गया इस विश्वविद्यालय की स्थापना 26 जून 1981 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के द्वारा किया गया था इस बार बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस के शुभ अवसर पर डॉ सोहन राम को अनुवांशिक एवं पौधा प्रजनन विभाग के मुख्य वैज्ञानिक जो है उनको बेस्ट साइंटिस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया इनको यह सम्मान टी सी फसल के कई उन्नत प्रभेदों के विकास और उनके विशिष्ट योगदान के लिए दिया गया है।
डॉक्टर सोहन राम किसी फसल पर पुस्तक भी लिख रहे है।
पेरिस में चल रही तीरंदाजी विश्वकप प्रतियोगिता में झारखंड की दीपिका कुमारी को एक ही दिन में मिला तीन स्वर्ण पदक
रांची की दीपिका कुमारी समय झारखंड की तीन बेटियों ने 27 जून को विश्व तीरंदाजी मे परचम लहराया एवं इतिहास रचा।पेरिस में चल रही प्रतियोगिता में तीनों ने सोना पर निशाना साधा है।
अकेले दीपिका ने तीन स्वर्ण पदक हासिल किए हैं।
दीपिका ने एकल ,मिश्रित युगल, तथा टीम इवेंट मे सोना जीता है।
दीपिका ने पति अतनु दास के साथ भारत को मिश्रित इवेंट का विश्व विजेता बनाया है सबसे पहले उन्होंने पति अतनु दास के साथ मिलकर तीरंदाजी वर्ल्ड कप में रिकॉर्ड के मिश्रित युगल में सोना जीता उसके बाद झारखंड की ही कमालिका तथा अंकिता के साथ मिलकर महिला टीम इवेंट में स्वर्ण पदक हासिल किया थोड़ी देर बाद दीपिका की झोली में महिला एकल गोल्ड भी शामिल हो गया इस तरह दीपिका की गोल्ड की टिकरी पूरी हुई और वह 5 घंटे से भी कम समय में पूरी की।
ईज आफ लिविंग इंडेक्स 2020 में रांची को मिला 42 वा स्थान
हाल ही में जारी ईज ऑफ लिविंग इंडेक्स 2020 में झारखंड की राजधानी रांची को 42 वां स्थान मिला है वही धनबाद शहर को 48 वां स्थान मिला।झारखंड की इन दो बड़े शहरों की रैंकिंग में सुधार हुआ है यानी इन दो शहरों में अब रहना पहले से और अधिक सुगम हो गया है। वर्ष 2018 में रांची 68 वा और धनबाद को 94 वा पायदान मिला था।
झारखंड की राजधानी रांची 10 लाख की आबादी वाले 49 शहरों में 42 वें स्थान पर है। गुणवत्ता युक्त जीवन में रांची को 27 माह और आर्थिक मजबूती में 39 वां स्थान मिला है। इज इंडेक्स ऑफ लिविंग 2020 में बेंगलुरु को सबसे बेहतर शहर माना गया है वहीं पड़ोसी राज्य बिहार के पटना शहर को 33 वां स्थान प्राप्त हुआ है।
झारखंड की कवित्री डॉ रजनी शर्मा चंदा को रायडू मैन ऑफ इंडिया सम्मान से सम्मानित किया गया है।
अभिनेता सोनू सूद ने झारखंड राज के धनबाद जिले की राष्ट्रीय निशानेबाज कोनिका लायक को जर्मन राइफल दी और उनका आगे की ट्रेनिंग के लिए अंतरराष्ट्रीय जयदीप कर्मकार शूटिंग अकादमी कोलकाता में एडमिशन भी करवाया है।
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झारखंड के स्वतंत्रता सेनानी
झारखंड के सबसे पहले स्वतंत्रता सेनानी तिलकामांझी है।इनका जन्म 11 फरवरी 1750 इसवी को तिलकपुर थाना सुल्तानगंज जिले में हुआ।
तिलकामांझी का संथाल का या फिर पहाड़िया का होने का लेकर काफी मतभेद है परंतु महाश्वेतादेवी के बांग्ला उपन्यास सालगिरह डाके में तिलकामांझी को संथाली आदिवासी बताया गया है।
तिलकामांझी का वास्तविक नाम जावरा पहाड़िया था जबरा पहाड़िया इनका वास्तविक नाम है और इनका नाम तिलकामांझी नाम अंग्रेजो के द्वारा दिया गया था। तिलका का अर्थ होता है गुस्से लाल आंख वाला और मांझी पहाड़िया समुदाय के ग्राम प्रधान को मांझी कहा जाता है इन्हीं दो शब्दों के मेल से तिलकामांझी नाम उनका रखा गया था।तिलकामांझी स्वाभिमानी दूरदर्शी दबंग तीरंदाजी और स्वतंत्रता प्रेमी थे अंग्रेजों के अत्याचार के कारण काफी विरोधी बन गए।जिसके बाद उन्होंने भागलपुर के निकट बंजारी जोर नामक स्थान में एक दल तैयार करके विद्रोह शुरू किया। वे सरकारी खजाना को लूट कर गरीबों में बांट दिया करते थे। 1784 इसवी में क्लीवलैंड नामक अधिकारी को राजमहल क्षेत्र का सुप्रिडेंट बनाकर अंग्रेजी सरकार ने भेजा था। उस समय तिलकामांझी अंग्रेजों के विरुद्ध काफी भीषण आंदोलन कर रहे थे इन्हीं सभी को देखते हुए अंग्रेज सरकारों ने क्लीवलैंड को अधिकारी बनाकर राजमहल में भेजा उसके बाद क्लीवलैंड ने पहाड़ियों सरदार को अपने पक्ष में मिलाकर पहाड़ियां सैनिक टुकड़ी बना ली। क्लीवलैंड ने 9 महीने में 47 गांव का 13100 पहाड़िया सैनिक तैयार किया। तिलकामांझी गोरिल्ला युद्ध में माहिर थे वह चुपके वार करने में काफी होशियार थे वह अंग्रेजी फौज पर तीन और गुलेल से निशाना लगाते थे। 1784 इसवी में तिलका मांझी भागलपुर मैं खुलेआम अंग्रेजों पर आक्रमण करना शुरू कर दिया और अंग्रेजी अधिकारी क्लीवलैंड को तीर मारकर गिरा दिया। जिसके बाद अंग्रेजी सरकार उग्र हो गई।क्लीवलैंड की हत्या करने के बाद तिलकामांझी सुल्तानगंज की पहाड़ियों में शरण ले लेता है। पहाड़िया सरदार जोरा जिसने अंग्रेजो का साथ दिया था तिलकामांझी और उसके साथियों को घेर लिया। सरदार जोरा ने अंग्रेजी अधिकारी आयरकूट जो क्लीवलैंड के मृत्यु के बाद वहां के अधिकारी बने थे उसे तिलकामांझी का पता बता दिया। जिसके बाद आयरकूट अंग्रेजों की बहुत बड़ी सेना लेकर सुल्तानगंज की पहाड़ियों में छुपे हुए तिलकामांझी को धोखे से पकड़ लेती है। ऐसा ऐसा कहा जाता है कि तिलकामांझी को अंग्रेजों ने चार घोड़ों के पीछे रस्सी से बांधकर घसीटते हुए भागलपुर लेकर आया था।खून से लाल तिलकामांझी का शरीर होने के बावजूद भी वह जिंदा थे और गुस्सैल थे यह देख कर अंग्रेजों की डर का ठिकाना नहीं रहा और और तिलकामांझी को13 जनवरी 1750 ईसवी में भागलपुर में बरगद के पेड़ पर लटका कर फांसी दे दिया गया।
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झारखंड में सबसे अधिक जनसंख्या वाली जनजाति संथाल जनजाति है।
झारखंड के संथाल परगना में पाए जाते है। संथाल जनजाति के लोगों की भाषा संथाली है ।की
संथाली भाषा की लिपि ओलचिकी है और इसके जनक रघुनाथ मुरमू को कहा जाता है संथाली लोगों की सबसे अधिक जनसंख्या संथाल परगना में निवास करती है या झारखंड में पाए जाने वाली कुल जनजातियों की संख्या का 35% जनसंख्या है।
झारखंड की संथाल जनजाति की भाषा संथाली भाषा को भारत के संविधान की आठवीं अनुसूची में 92वें संविधान संशोधन 2004 के तहत शामिल किया गया है।
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झारखंड की 32 जनजातियां
झारखंड मे जनजातियों की संख्या 32 है।
झारखंड में सबसे अधिक जनसंख्या वाली जनजाति संथाल जनजाति की है।इस जनजाति की कुल जनसंख्या झारखंड में पाए जाने वाली कुल जनजाति की जनसंख्या की 35% है।संथाल जनजाति झारखंड की सभी जनजातियों में सबसे अधिक जनसंख्या वाली जनजाति है।
झारखंड की 32 जनजातियों में सर्वाधिक जनसंख्या वाली जनजाति संथाल की जनजाति है।
दूसरे स्थान पर सबसे अधिक जनसंख्या में उरांव की जनजातियां आती है। तीसरे स्थान पर सबसे अधिक जनसंख्या में मुंडा की जनजाति आती है और चौथे स्थान पर सबसे अधिक जनसंख्या में हो जनजाति आती है।
झारखंड के 32 जनजातियों में 32 व जनजाति जिसे सबसे नवीनतम जनजाति बोला जा सकता है कोरा जनजाती है। यह झारखंड का 32 वा जनजाति है और नवीनतम जनजाति है जिसे 2003 में इस सूची में शामिल किया गया।
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