Saturday, July 24, 2021

झारखंड के साहित्य एवं साहित्यकार-khortha or nagpuri sahitya literature

खोरठा साहित्य एवं साहित्यकार


 श्रीनिवास पानूरी - मेघदूत ,

                            दिव्य ज्योति ,

                            बाल किरण ,

                             मातृभाषा, 

                             झींगा फूल, 

                             चाबी कोठी


वासुदेव महतो -हेलवा

गजाधर महतो - पुटुस फूल

चितरंजन महतो -जिंदगी टोंह

सुकुमार - डाह

बंसीलाल - डिंडाक डोआनी

गिरधारी गोस्वामी - आगु जन्मे

आदित्य मित्र (संथाली ) - गौसा बाह





नागपुरी भाषा एवं साहित्य एवं उनके साहित्यकार


ई एच हिव्टली - नोट्स ऑन द डायलेवट और लोहरदगा छोटा नागपुर


फादर कॉनरैड बुक आउट- ग्राफ ऑफ द नागपुरिया सदानी लैंग्वेज 1906


इग्निस कुजूर - झारखंड दोमुहाने


केसरी कुमार - नागपुरिया भाषा एवं साहित्य


धनीराम बाग्शी -दुर्गा सप्तशती ,नारद मोह लीला, जितिया कहानी, बुढ़िया कर कहानी


बेनी राम महथा -नागवंशावली


घासीराम- नागवंशावली ,फांग्ली ,फागशतक ,झूमर


द्रुपाल देवघरिया - नलचरित्र


कंचनी - कृष्ण चरित्र, सुदामा चरित्र, लंकाकांड ,महाभारत


हरिनंदन राम -भाईगे बाचलक जिया मोर


विशेश्वर प्रसाद केसरी -ठाकुर विश्वनाथ शाही


श्रवण कुमार गोस्वामी- नागपुरी शिष्ट साहित्य तीतर की छांव सेवा ओउर नौकरी


कुरमाली भाषा साहित्य एवं साहित्यकार


बुधु महतो - करम गीत

  जगराम -जगरामीनारायण

 देवकीनंदन प्रसाद - निधरे आंखि जल आंखि पाते

      निरंजन महतो - नेठा पाला 

   राजेंद्र प्रसाद महतो -कपिला मंगला 

       खुदीराम महतो - कुरमाली भाषा तत्व 

सृष्टिधर सिंह कटिहार - भात-भगवान साधन संगीत मानभूमेक धंधौरा 


रामेश्वर महतो -झूमर संगीत वाला संगीत पाली संगीत

डॉ नंदकिशोर -पथे लक लेहा नमस्कार

राजा उपेंद्रनाथ सिंहदेव , रघुवर प्रकाशन रांची - आदि झूमर संगीत 1956



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Saturday, July 10, 2021

झारखंड के प्रमुख त्यौहार

झारखंड के प्रमुख त्यौहार

सरहुल

यह सबसे बड़ा जनजाति उत्सव है जो प्राकृतिक पर्व के रूप में मनाया जाता है यह पृथ्वी और सूर्य के मिलन का पर्व है। सूर्य की शक्ति अर्थात पुरुष की ओर पृथ्वी की प्रकृति अर्थात नारी की प्रतीक है।उन दोनों की संतान मनुष्य को फसल की प्राप्ति हो पर्व का यही लक्ष्य था।

झारखंड का वसंत उत्सव त्यौहार है, जो चेत्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है।
यह झारखंड की सभी जनजातियों का पर्व है तथा अलग-अलग जातियों में से अलग अलग नाम से जाना जाता है।

उराव जनजाति        - खद्दी/खट्टी
खड़िया जनजाति     - जकोर
संथाल जनजाति      - बा परब /बाहा
मुंडा जनजाति         -सरहुल

कुछ जनजाति में इसे होली, पोंगल तथा  टूसु कहा जाता है।
मुंडा समाज में सरवन से संबंधित कई दंत कथाएं प्रचलित हैं।
इस पर्व में साल वृक्ष की माता को प्रदर्शित किया जाता है क्योंकि यह स्वीकार किया जाता है कि साल वृक्ष में देवता बंगा निवास करते हैं। यह फूलों का त्यौहार है इस समय साल के वृक्ष में नया फूल खिलते हैं। यह पर वह 4 दिनों तक मनाया जाता है।इस पर्व में मछली के अभिषेक किए हुए जल को घर में छिड़का जाता है तथा उपवास रखा जाता है तथा पहन हर घर की छत पर साल फूल रखता है जिसे फूल खोसी कहा जाता है।


पान द्वारा सरना स्थल पर सरई सखुआ के फूलों की पूजा करता है तथा पहन उपवास रखता है सरना स्थल में महिलाओं पूजा में शामिल नहीं होती पर्व के दूसरा दिन उपवास सरना में लूट तुम हरम तथा लूट कोंबड़ी की पूजा तथा सिंह बोंगा देसावली तथा ग्राम बोंगा का आमंत्रण रहता है। 



मांडा

वैशाख माह के शुक्ल पक्ष के तृतीय को आयोजित किया जाता है। इसमें भगवान शिव यानी महादेव की पूजा की जाती है, यह पूजा एक कठिन पूजा है क्योंकि लोहे से शरीर में छेद करना आग पर चलना इत्यादि क्रिया भी संपादित की जाती है। जाते हुए अंगारों पर चलना फुल खूंदी कहलाता है।वक्ताओं को रात में धूप धवन की अग्नि रेखाओं के ऊपर उल्टा लटका कर जलाया जाता है, जिसे धुवांसी से कहा जाता है।
इस पर्व को करने वाले पुरुष को भक्ता कहते हैं जबकि महिला को सोक्ताइन कहते हैं।

करमा

यह जनजातियों का एक अन्य प्रमुख पर है तथा या प्रकृति त्यौहार है जिसमें कर्म की प्रधानता को महत्व दिया जाता है।
यह पर्व भाग्य भादो मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाया जाता है। यह परिक्रमा एवं धर्मा दो भाइयों की कथा पर आधारित है। कर्मा के के प्रकार है तथा झारखंड में से 10 प्रकार से आयोजित किया जाता है-जैसे -राजी करमा, सराय करमा जितिया करमा, बुढी करमा, बंबा करमा इत्यादि।

मुंडा जनजाति में कर्मा की दो श्रेणियां प्रचलित है-

राज करम- व्यक्तिगत रूप से घर आंगन में मनाया जाता है। इसे पारिवारिक पूजा के रूप में भी कहा जा सकता है।

देश करमा - गांव के आखरा में मनाया जाता है। इसे राज कर्मा केेेे विपरीत माना जा स हैै क्योंकि यह सामूहिक पूजाा के रूप में मनाया जाता है। जवा को प्रसाद केेे रूप मेंं वितरित किया जाता है। मुंडााा ओं का विश्वास है कि इस अवसर पर करम गोसाई से जो भी वर मांगा जाता है उसकी प्राप्ति हो जाती है।

उरांव जनजाति में अंडा रखकर पूजा की जाती है ।कर्मा की शाम संजोत कही जाती है इ।रात वाहन कर्मा धर्मा की कहानी सुनाता है।मनपसंद वर तथा वधू की प्राप्ति के लिए युवक युवतियां उपवास रख 'नचवा 'में चूड़ा खीरा दीपक टैक्सी के पत्ते से लेकर आखरा में रखते है।

सदनों में यह पूजा लोकप्रिय है।
छोटा नागपुर के कुछ भागों में प्रत्येक तीसरे वर्ष बूढ़ी कर्मा मनाने की प्रथा इसमें केवल वृधाये में भाग लेती है। यह पर्व विशेषता अकाल पड़ने पर मनाया जाता है।

कुरमाली क्षेत्रों में कुर्मी कन्याएं रक्षाबंधन की जगह करमा पर्व को ही मनाती हैं। हिंदुओं के भैया दूज की भांति भाई-बहन के प्रेम का पर्व है।

सोहराय

धान की फसल की कट जाने के बाद मनाया जाने वाला सराय संस्थानों का सबसे बड़ा पर्व है। यह पशु पूजा के रूप में आयोजित किया जाता है जो कार्तिक माह की अमावस्या दीपावली के दूसरे दिन को मनाया जाता है। यह पर्व 5 दिनों तक मनाया जाता है।

प्रथम दिन:- स्नान के बाद 'गोंड टांडी' (बघान) में जोहर एरा का आह्वान किया जाता है।

दूसरा दिन:-   गोहायल पूजा किया जाता है। इस दिन विवाहित लड़कियां भी अपने मायके से आ जाती है।

तीसरा दिन:- 'संटाऊ'होता है।
                    मांझी पौराणिक आदि से साधारण गृहस्त तक अपने पशुओं को धान की बाती तथा मालाओं से सजाकर खूंटते हैं। तथा बाजा गाजा के साथ सामूहिक रूप से उन्हें भड़काते हुए नाचते कूदते हैं।

चौथा दिन:- जाले होता है।इस दिन युवक-युवतियां प्रत्येक गृहस्थ के यहां नाच गाकर चावल, दाल ,नमक तथा मसाले आदि कट्ठा करते हैं।
पांचवा दिन:- 
     सह भोज
जोग मांझी के देखरेख में उपयुक्त चीजों की खिचड़ी पकती है तथा सहभोज होता है।






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Friday, July 9, 2021

झारखंड की प्रोटो ऑस्ट्रोलायड प्रजाति ।। jharkhand protoastroloid -itsdpktym

झारखंड की प्रोटो ऑस्ट्रोलायड प्रजाति

संथाल जनजाति
 मुंडा जनजाति 
हो जनजाति 
खरवार जनजाति
 असुर जनजाति 
बिरहोर जनजाति 
बिरजिया जनजाति 
कोरवा जनजाति मा
पहाड़िया जनजाति 
सौरिया पहाड़िया जनजाति 
परहिया जनजाति 
सबर जनजाति 
चेरो जनजाति 
गोड़ाइत
 खड़िया जनजाति 
कोरा जनजाति
 भूमिज जनजाति
 कंवर जनजाति 
करमाली जनजाति 
लोहरा जनजाति 
कोल जनजाति

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Thursday, July 8, 2021

Jharkhand current affairs ।। झारखंड करंट अफेयर्स- itsdpktym

Q.झारखंड में हर जिले में सोलर प्लांट लगाकर कितने मेगावाट बिजली उत्पादित की जाएगी

उत्तर-900 मेगा वाट



 झारखंड देश का पहला राज्य होगा जिसके हर जिले में सोलर प्लांट स्थापित किया जाएगा ।इससे राज्य में बिजली की कमी को काफी हद तक पूरा किया जाएगा। राज्य में बिजली की वर्तमान औसत मांग 2050 मेगावाट है । मांग को आधार बनाते हुए अभी राज्य में 900 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए झारखंड सरकार ने हर जिले में सोलर प्लांट लगाने का फैसला लिया है ।जिसके हर प्लांट से 900 मेगावाट बिजली उत्पादित किया जाएगा ।इस समय राज्य में केवल 25 मेगा वाट सौर ऊर्जा का उत्पादन हो रहा है ।आने वाले समय में केतलशूद बांध जो रांची में स्थित है उस में तैरता हुआ सोलर प्लांट लगाया जा रहा है जिसमें 100 मेगा वाट का सोलर प्लांट लगाने का प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है।

इसके अलावा जितने भी झारखंड में सरकारी भवन है उनके छात्र पर 16 संयंत्र लगाने और उन से बिजली उत्पादित करने का तरीके को अपनाया जा रहा है।

पहले 2022 2023 तक जमीन पर सोलर संयंत्र लगाकर 500 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है अब हर जिले में सोलर प्लांट लगाकर 900 मेगा वाट सौर ऊर्जा उत्पादन किया जाएगा।


Q.झारखंड के नए राज्यपाल कौन बने हैं

उत्तर-  रमेश बैस


भारत के राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद ने झारखंड सहित देश के कुल 7और राज्यों में राज्यपालों का बदलाव किया है। जिसमें से चार राज्यपालों का हस्तांतरण किया है और 4 नए राज्यपालों की नियुक्ति की है।

नए राज्यपालों एवं राज्यों के नाम इस प्रकार है


राज्यपाल            राज्य

झारखंड            - रमेश बैस 

हरियाणा           -बंडारू दत्तात्रेय

गोवा                -पीएस श्रीधरन पिल्ले

मध्य प्रदेश        - भाई छगनभाई पटेल

त्रिपुरा              - सत्यदेवनारायण आर्य

मिजोरम           -    डॉ हरी बाबू कमभम पति

कर्नाटक            -   थावरचंद गहलोत

हिमाचल प्रदेश   - राजेंद्र विश्वनाथ अलंकर


बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के अनुवांशिक एवं पौधा प्रजनन विभाग के मुख्य वैज्ञानिक डॉक्टर सोहन राम को बेस्ट साइंटिस्ट अवार्ड प्रदान किया गया है ।

बिरसा कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना दिवस अवसर पर सोहन राम को बेस्ट साइंटिस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया है।

बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस इस बार 26 जून 2021 को मनाया गया इस विश्वविद्यालय की स्थापना 26 जून 1981 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के द्वारा किया गया था इस बार बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस के शुभ अवसर पर डॉ सोहन राम को अनुवांशिक एवं पौधा प्रजनन विभाग के मुख्य वैज्ञानिक जो है उनको बेस्ट साइंटिस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया इनको यह सम्मान टी सी फसल के कई उन्नत प्रभेदों के विकास और उनके विशिष्ट योगदान के लिए दिया गया है।

डॉक्टर सोहन राम किसी फसल पर पुस्तक भी लिख रहे है।



पेरिस में चल रही तीरंदाजी विश्वकप प्रतियोगिता में झारखंड की दीपिका कुमारी को एक ही दिन में मिला तीन स्वर्ण पदक

रांची की दीपिका कुमारी समय झारखंड की तीन बेटियों ने 27 जून को विश्व तीरंदाजी मे परचम लहराया एवं इतिहास रचा।पेरिस में चल रही प्रतियोगिता में तीनों ने सोना पर निशाना साधा है।

अकेले दीपिका ने तीन स्वर्ण पदक हासिल किए हैं।

दीपिका ने एकल ,मिश्रित युगल, तथा टीम इवेंट मे सोना जीता है।

दीपिका ने पति अतनु दास के साथ भारत को मिश्रित इवेंट का विश्व विजेता बनाया है सबसे पहले उन्होंने पति अतनु दास के साथ मिलकर तीरंदाजी वर्ल्ड कप में रिकॉर्ड के मिश्रित युगल में सोना जीता उसके बाद झारखंड की ही कमालिका तथा अंकिता के साथ मिलकर महिला टीम इवेंट में स्वर्ण पदक हासिल किया थोड़ी देर बाद दीपिका की झोली में महिला एकल गोल्ड भी शामिल हो गया इस तरह दीपिका की गोल्ड की टिकरी पूरी हुई और वह 5 घंटे से भी कम समय में पूरी की।



ईज आफ लिविंग इंडेक्स 2020 में रांची को मिला 42 वा स्थान

हाल ही में जारी ईज ऑफ लिविंग इंडेक्स 2020 में झारखंड की राजधानी रांची को 42 वां स्थान मिला है वही धनबाद शहर को 48 वां स्थान मिला।झारखंड की इन दो बड़े शहरों की रैंकिंग में सुधार हुआ है यानी इन दो शहरों में अब रहना पहले से और अधिक सुगम हो गया है। वर्ष 2018 में रांची 68 वा और धनबाद को 94 वा पायदान मिला था। 

झारखंड की राजधानी रांची 10 लाख की आबादी वाले 49 शहरों में 42 वें स्थान पर है। गुणवत्ता युक्त जीवन में रांची को 27 माह और आर्थिक मजबूती में 39 वां स्थान मिला है। इज इंडेक्स ऑफ लिविंग 2020 में बेंगलुरु को सबसे बेहतर शहर माना गया है वहीं पड़ोसी राज्य बिहार के पटना शहर को 33 वां स्थान प्राप्त हुआ है।



झारखंड की कवित्री डॉ रजनी शर्मा चंदा को रायडू मैन ऑफ इंडिया सम्मान से सम्मानित किया गया है।


अभिनेता सोनू सूद ने झारखंड राज के धनबाद जिले की राष्ट्रीय निशानेबाज कोनिका लायक को जर्मन राइफल दी और उनका आगे की ट्रेनिंग के लिए अंतरराष्ट्रीय जयदीप कर्मकार शूटिंग अकादमी कोलकाता में एडमिशन भी करवाया है।

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Tuesday, July 6, 2021

झारखंड के स्वतंत्रता सेनानी तिलका मांझी।। Freedom fighters of Jharkhand-itsdpktym

             झारखंड के स्वतंत्रता सेनानी

झारखंड के सबसे पहले स्वतंत्रता सेनानी तिलकामांझी है।इनका जन्म 11 फरवरी 1750 इसवी को तिलकपुर थाना सुल्तानगंज जिले में हुआ।


तिलकामांझी का संथाल का या फिर पहाड़िया का होने का लेकर काफी मतभेद है परंतु महाश्वेतादेवी के बांग्ला उपन्यास सालगिरह डाके में तिलकामांझी को संथाली आदिवासी बताया गया है।

तिलकामांझी का वास्तविक नाम जावरा पहाड़िया था जबरा पहाड़िया इनका वास्तविक नाम है और इनका नाम तिलकामांझी नाम अंग्रेजो के द्वारा दिया गया था। तिलका का अर्थ होता है गुस्से लाल आंख वाला और मांझी पहाड़िया समुदाय के ग्राम प्रधान को मांझी कहा जाता है इन्हीं दो शब्दों के मेल से तिलकामांझी नाम उनका रखा गया था।तिलकामांझी स्वाभिमानी दूरदर्शी दबंग तीरंदाजी और स्वतंत्रता प्रेमी थे अंग्रेजों के अत्याचार के कारण काफी विरोधी बन गए।जिसके बाद उन्होंने भागलपुर के निकट बंजारी जोर नामक स्थान में एक दल तैयार करके विद्रोह शुरू किया। वे सरकारी खजाना को लूट कर गरीबों में बांट दिया करते थे। 1784 इसवी में क्लीवलैंड नामक अधिकारी को राजमहल क्षेत्र का सुप्रिडेंट बनाकर अंग्रेजी सरकार ने भेजा था। उस समय तिलकामांझी अंग्रेजों के विरुद्ध काफी भीषण आंदोलन कर रहे थे इन्हीं सभी को देखते हुए अंग्रेज सरकारों ने क्लीवलैंड को अधिकारी बनाकर राजमहल में भेजा उसके बाद क्लीवलैंड ने पहाड़ियों सरदार को अपने पक्ष में मिलाकर पहाड़ियां सैनिक टुकड़ी बना ली। क्लीवलैंड ने 9 महीने में 47 गांव का 13100 पहाड़िया सैनिक तैयार किया। तिलकामांझी गोरिल्ला युद्ध में माहिर थे वह चुपके वार करने में काफी होशियार थे वह अंग्रेजी फौज पर तीन और गुलेल से निशाना लगाते थे। 1784 इसवी में तिलका मांझी भागलपुर मैं खुलेआम अंग्रेजों पर आक्रमण करना शुरू कर दिया और अंग्रेजी अधिकारी क्लीवलैंड को तीर मारकर गिरा दिया। जिसके बाद अंग्रेजी सरकार उग्र हो गई।क्लीवलैंड की हत्या करने के बाद तिलकामांझी सुल्तानगंज की पहाड़ियों में शरण ले लेता है। पहाड़िया सरदार जोरा जिसने अंग्रेजो का साथ दिया था तिलकामांझी और उसके साथियों को घेर लिया। सरदार जोरा ने अंग्रेजी अधिकारी आयरकूट जो क्लीवलैंड के मृत्यु के बाद वहां के अधिकारी बने थे उसे तिलकामांझी का पता बता दिया। जिसके बाद आयरकूट अंग्रेजों की बहुत बड़ी सेना लेकर सुल्तानगंज की पहाड़ियों में छुपे हुए तिलकामांझी को धोखे से पकड़ लेती है। ऐसा ऐसा कहा जाता है कि तिलकामांझी को अंग्रेजों ने चार घोड़ों के पीछे रस्सी से बांधकर घसीटते हुए भागलपुर लेकर आया था।खून से लाल तिलकामांझी का शरीर होने के बावजूद भी वह जिंदा थे और गुस्सैल थे यह देख कर अंग्रेजों की डर का ठिकाना नहीं रहा और और तिलकामांझी को13 जनवरी 1750 ईसवी में भागलपुर में बरगद के पेड़ पर लटका कर फांसी दे दिया गया।





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Monday, July 5, 2021

संथाल जनजाति- Santhal Tribals ।। Itsdpktym

 झारखंड में सबसे अधिक जनसंख्या वाली जनजाति संथाल जनजाति है।

झारखंड के संथाल परगना में पाए जाते है। संथाल जनजाति के लोगों की भाषा संथाली है ।की

संथाली भाषा की लिपि ओलचिकी है और इसके जनक रघुनाथ मुरमू को कहा जाता है संथाली लोगों की सबसे अधिक जनसंख्या संथाल परगना में निवास करती है या झारखंड में पाए जाने वाली कुल जनजातियों की संख्या का 35% जनसंख्या है।

झारखंड की संथाल जनजाति की भाषा संथाली भाषा को भारत के संविधान की आठवीं अनुसूची में 92वें संविधान संशोधन 2004 के तहत शामिल किया गया है।


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झारखंड की 32 जनजातियां।। tsdpktym

 झारखंड की 32 जनजातियां

झारखंड मे जनजातियों की संख्या 32 है।

झारखंड में सबसे अधिक जनसंख्या वाली जनजाति संथाल जनजाति की है।इस जनजाति की कुल जनसंख्या झारखंड में पाए जाने वाली कुल जनजाति की जनसंख्या की 35% है।संथाल जनजाति झारखंड की सभी जनजातियों में सबसे अधिक जनसंख्या वाली जनजाति है।



झारखंड की 32 जनजातियों में सर्वाधिक जनसंख्या वाली जनजाति संथाल की जनजाति है।

दूसरे स्थान पर सबसे अधिक जनसंख्या में उरांव की जनजातियां आती है। तीसरे स्थान पर सबसे अधिक जनसंख्या में मुंडा की जनजाति आती है और चौथे स्थान पर सबसे अधिक जनसंख्या में हो जनजाति आती है।


झारखंड के 32 जनजातियों में 32 व जनजाति जिसे सबसे नवीनतम जनजाति बोला जा सकता है कोरा जनजाती है। यह झारखंड का 32 वा जनजाति है और नवीनतम जनजाति है जिसे 2003 में इस सूची में शामिल किया गया।

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